विधानसभा की प्रवर समिति का कार्यकाल एक माह बढ़ा।

विधानसभा की प्रवर समिति का कार्यकाल एक माह बढ़ा।
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देहरादून–विधानसभा के पटल से प्रवर समिति के पास पहुंचे राज्य आंदोलनकारी आरक्षण विधेयक में आश्रितों की श्रेणी में तलाकशुदा और परित्यक्ता बेटियों को भी शामिल करने का सदस्यों ने सुझाव दिया था। साथ ही राज्य सरकार की सभी भर्ती परीक्षाओं में राज्य आंदोलनकारियों व उनके आश्रितों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की हिमायत की थी।

विधानसभा के सभागार में प्रवर समिति के अध्यक्ष संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को राजकीय सेवाओं में आरक्षण बिल पर मंथन हुआ था। बैठक में सदस्यों ने प्रस्तावित बिल में संशोधन करने के लिए सुझाव दिए थे।  बैठक में समिति ने कोई फैसला नहीं लिया था। प्रवर समिति की दूसरी बैठक होनी थी लेकिन अभी तक दूसरी बैठक नहीं हुई और प्रवर समिति का कार्यकाल 26 सितंबर को समाप्त हो रहा है, जिसके चलते विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण संबंधी विधेयक के लिए गठित प्रवर समिति का कार्यकाल एक माह बढ़ा दिया है। प्रवर समिति का कार्यकाल 26 सितंबर को समाप्त हो रहा था जिसे बढा दिया गया है… आपको बता दे कि विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार ने राज्य निर्माण आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए विधेयक पेश किया था, लेकिन इस विधेयक को प्रवर समिति को सौंप दिया गया था। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने इसके लिए संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की अध्यक्षता में प्रवर समिति का गठन किया था। इस समिति को 15 दिन में विधेयक पर अपने सुझाव देने को कहा गया था, लेकिन प्रवर समिति की अभी एक ही बैठक हो पाई है। इसे देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने विधानसभा अध्यक्ष से समिति का कार्यकाल एक महीने बढ़ाने का अनुरोध किया था।

Rupesh Negi

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