आमजन की जेब पर महंगाई का बोझ लेकर आया नया वित्तीय वर्ष, आज से बिजली-पानी समेत कई चीजें हुई महंगी।

आमजन की जेब पर महंगाई का बोझ लेकर आया नया वित्तीय वर्ष, आज से बिजली-पानी समेत कई चीजें हुई महंगी।
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देहरादून– अप्रैल का महीना शुरू होते ही आम आदमी पर महंगाई की मार पड़ गई है। कई सामान ऐसे हैं जो 1 अप्रैल से महंगे हो गए। इनका सीधा बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। आम आदमी जो पहले ही महंगाई की आग से झुलस रहा है। सामानों के दाम बढ़ने से उसकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।

बिजली एवं पानी की दरों में बढ़ोतरी के साथ ही शनिवार से राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर भी महंगा होगा। नया वित्तीय वर्ष उत्‍तराखंड के आमजन की जेब पर महंगाई का बोझ लेकर आ रहा है। नया वित्तीय वर्ष उत्‍तराखंड के आमजन की जेब पर महंगाई का बोझ लेकर आ रहा है। बिजली एवं पानी की दरों में बढ़ोतरी के साथ ही शनिवार से राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर भी महंगा होगा।

हालांकि, टोल शुल्क बढ़ने का असर राज्य परिवहन निगम की बसों के किराये पर एक हफ्ते तक नहीं पड़ेगा, लेकिन टोल से गुजरने वाले वाहनों को अधिक शुल्क जरूर चुकाना पड़ेगा। वहीं प्रदेश में वाहनों की नई स्क्रैप पालिसी लागू होने से विभिन्न सरकारी विभागों के 15 वर्ष से अधिक पुराने 50हजार से अधिक वाहन चलन से बाहर कर दिए जाएंगे। उत्तराखंड में आज से बिजली की बढ़ी हुई दरें लागू हो जाएंगी। अब तक चल रही विद्युत दरों में 1.79 प्रतिशत का इजाफा हो गया है। जबकि, बीते वर्ष की तुलना में बिजली के दाम कुल 9.64 प्रतिशत बढ़ गए हैं। इस बार केवल घरेलू श्रेणी में 3.44 प्रतिशत की भारी वृद्धि की गई है, जबकि, बीपीएल और स्नोबाउंड उपभोक्ताओं को भी अब 10 पैसे प्रति यूनिट अधिक देने होंगे। हालांकि, बड़े उद्योगों को नए टैरिफ में पूरी राहत दी गई है। बीपीएल उपभोक्ताओं को जहां 1.65 रुपये प्रति यूनिट के स्थान पर अब 1.75 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होगा। जबकि, अन्य घरेलू उपभोक्ताओं को 100 यूनिट तक 2.95 की जगह 3.15 रुपये प्रति यूनिट और 200 यूनिट तक 4.40 की जगह 4.60 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होगा।

उत्तराखंडवासियों के लिए हलक तर करना भी महंगा हो गया है। पानी के बिल में 9 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई है। इस लिहाज से अब आपका पानी का बिल 50 से 100 रुपये त्रैमासिक तक बढ़कर आ सकता है। शासन की व्यवस्था के तहत हर साल एक अप्रैल से पानी के बिल में वृद्धि हो जाती है। शहरी क्षेत्रों में पानी का बिल हाउस टैक्स के आधार पर तय किया जाता है। शहरी क्षेत्रों में पानी के बिल में हर वर्ष 11 प्रतिशत के करीब बढ़ोतरी होती है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में घर में लगे नलों की संख्या के आधार पर बिल और उसमें बढ़ोतरी का निर्धारण किया जाता है। घर में दो नल होने पर बिल में नौ प्रतिशत और दो से अधिक नल होने पर 11 प्रतिशत और कमर्शियल कनेक्शन पर 15 प्रतिशत तक की वृद्धि की जाती है। जल संस्थान की ओर से हर तीन माह में पानी के बिल जारी किए जाते हैं।

आज से दून शहर में डोर-टू-डोर सफाई के यूजर चार्ज की दरों में बढ़ोतरी हो जाएगी। नगर निगम की ओर से बीपीएल को छोड़कर अन्य परिवारों के लिए यूजर चार्ज 50 रुपये के बजाय अब 70 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। हाउसिंग सोसायटी के लिए दर 40 फ्लैट तक दो हजार रुपये, 41 से 100 फ्लैट तक पांच हजार रुपये, 100 फ्लैट से ज्यादा फ्लैट पर दस हजार रुपये प्रतिमाह यूजर चार्ज किया गया है। छात्रावास वाले शिक्षण संस्थाओं को अब 2 हजार रुपये प्रतिमाह शुल्क देना होगा। वहीं, भवन कर जमा नहीं करने वालों को नए वित्तीय वर्ष में छूट का लाभ नहीं मिलेगा और पिछले वर्ष के लंबित भुगतान पर जुर्माना देना पड़ेगा। नगर निगम में वित्तीय वर्ष 2023-24 का भवन कर समय से जमा करने पर संबंधित व्यक्ति को 25 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसके साथ ही बकायेदारों पर प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत ब्याज के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।

देहरादून-हरिद्वार राजमार्ग पर पड़ने वाले लच्छीवाला टोल प्लाजा पर सभी वाहनों का टोल शुल्क आज से बढ़ जाएगा। शनिवार से निजी कार का टोल 100 रुपये देने पड़ेगा, जो पहले 95 रुपये था। हल्के व्यावसायिक वाहनों का टोल 155 रुपये के बजाय 165 रुपये जबकि भारी वाहन का टोल 510 के बजाए 535 रुपये होगा। 24 घंटे के भीतर वापसी में कार का टोल 150 रुपये, हल्के व्यावसायिक वाहनों का टोल 245 रुपये होगा। बढ़ी हुई दरों में पिछले वर्ष के मुकाबले तीन से छह प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। वहीं, टोल प्लाजा के नियमों के अनुसार, स्थानीय डोईवाला वासियों के लिए पूर्व की भांति इस वर्ष भी निश्शुल्क पास की व्यवस्था जारी रहेगी। 20 किमी के दायरे में आने वाले निजी वाहनों के लिए मासिक पास की व्यवस्था मामूली वृद्धि के साथ 315 रुपये से बढ़ाकर 330 रुपये प्रतिमाह की गई है। व्यावसायिक हल्के वाहनों के लिए मासिक पास 3210 रुपये के बजाय अब 3375 रुपये में बनेगा।

टोल शुल्क में बढ़ोतरी के बावजूद अभी उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों का किराया नहीं बढ़ेगा। परिवहन निगम प्रबंधन के अनुसार, निगम की बसों का किराया पहले ही राउंड फिगर में चलता है। यानी, अगर 27 रुपये किराया होगा तो निगम 25 रुपये किराया लेता है और 28 रुपये किराया हो तो यात्री से 30 रुपये लिए जाते हैं।

सरकार 1 अप्रैल 2023 से आयात शुल्क में इजाफा हुआ है, इसकी वजह घरेलू उद्योग को मजबूत करना है। सरकार अगर आयात शुल्क में बढ़ोतरी करती है तो इससे कई सामानों के दाम बढ़ जाएंगे। इसमें प्लास्टिक के सामान, आभूषण, हाई-ग्लॉस पेपर, विमटामिन, निजी विमान, हेलीकॉप्टर और हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में बढ़ोतरी होगी। बता दें कि वित्त मंत्री, निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2023 में घोषणा की थी कि एक अप्रैल से इलेक्ट्रिक चिमनी, सोना और प्लेटिनम जैसे सामानों की कीमतों में इजाफा हो होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चिमनियों पर सीमा शुल्क को 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है।

ऐसे में टोल का शुल्क बढ़ने से किराये में फिलहाल वृद्धि नहीं होगी। अगले एक हफ्ते तक टोल की दरों का आकलन किया जाएगा। दिल्ली, चंडीगढ़, अंबाला, लखनऊ, कानपुर, हल्द्वानी, जयपुर आदि मार्गों पर टोल प्लाजा अधिक हैं। ऐसे में इन मार्गों की बसों में किराये में वृद्धि की जा सकती है।

उत्तराखंड प्रदेश में एक अप्रैल से वाहनों की नई स्क्रैप पालिसी भी लागू होने से सरकारी विभागों के 15 वर्ष पुराने वाहन चलन से बाहर हो जाएंगे। इसकी जद में 5 हजार से अधिक वाहन आ रहे हैं। स्क्रैप पालिसी के तहत नए वाहन खरीदने में केंद्र सरकार राज्य को आर्थिक मदद देगी। हालांकि अभी निजी वाहनों को इस दायरे में नहीं लिया गया है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में स्क्रैप नीति लागू की थी। इसका उद्देश्य अनुपयुक्त और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से संचालन से बाहर करना है। प्रदेश में अभी तक 15 वर्ष से अधिक पुराने सरकारी वाहनों को नीलाम करने की व्यवस्था है। इसके बाद खरीदार इन वाहनों को दुरुस्त कर नए सिरे से पांच साल के लिए पंजीकरण कर इनका संचालन करने लगते हैं। परिवहन विभाग के आकलन के मुताबिक, प्रदेश में तकरीबन हर साल करीब 300 सरकारी वाहन 15 साल की आयु पूरी करते हैं।

एक अप्रैल से टोल टैक्स,किताबे कॉपियां, के रेट बड़े है जबकि शराब के दाम में गिरावट आई है, इस पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है उन्होंने कहा कि सब चीजों में प्रदेश की पब्लिक को गन्ने की तरह निचोडा जा रहा है ऐसा लगता है गन्ना पिरोने की मशीन लग गई है, विद्युत के दाम इस ऊर्जा प्रदेश में चौथी बार बड़े हैं और कम नहीं बड़े है कल जो इन्होंने विद्युत के दाम बढ़ाने का प्रस्ताव किया वह 13.2 किया है जो अपने आप में एक बड़ी धनराशि है उसके अलावा गांव गांव नल गांव गांव जल के नाम से जो योजना बनाई हाइड्रोलिक सिस्टम से कोई भी योजना नही बनी है पानी उतना ही है और घर-घर नल लगाकर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया और जिन गांव में फ्री में पानी मिलता था एसटेम्पोस्ट से अब उन घरों में हर महीने 250 से 300 रुपए के बीच में बिल आ रहे हैं बिना पानी के 8 से 6 दिन में 1 बार पानी आ रहा है ओर बिल आ रहे है, गांव वालों को बिजली में भी लुटा जा रहा है पानी मे लुटा जा रहा है । ठीक होली के टाइम पर गैस के दाम बढ़ा दिए गए है आज सब्जियां,फल अनाज महंगी है,आज आदमी परेशान है,यंहा तक कि इस प्रदेश में पढ़ने वाले बच्चो की स्टेनरी पेन कॉपी सब कुछ महँगा कर दिया है,अगर इस प्रदेश में कोई चीज सस्ती हुई है तो केवल ओर केवल दारू सस्ती हुई है ओर बाक़ी सभी चीजें महंगी हुई है प्रदेश को दारू में डुबोने का सोच के सरकार ने रखा है ऐसा लगता है,पढ़ने वाले बच्चों से लेकर किसान तक सब परेशान है किसानों का पुराना भुगतान के लिए गन्ना किसान लगातार आंदोलनरत है वही सरकार के कान में जूं तक नही रेंगती, जिस गन्ने से चिन्नी बनती है वो महंगी हो गई जिस गन्ने के सिरे से अल्कोहल बनती है अल्कोहल महँगा है मिथॉलन महँगा है एथॉनल महँगा है लेकिन किसान को एक कुन्तल पर 50 पैसे की भी राहत सरकार ने नही दी है जो अपने आप मे बहुत ही निदनीय है और भर्त्सना करने लायक है।

Rupesh Negi

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