पूर्व मुख्यमंत्री के बयान के बाद राजनैतिक गलियारों में माहोल गर्म, कांग्रेस, ओर आम आदमी पार्टी ने साधा निशाना।

पूर्व मुख्यमंत्री के बयान के बाद राजनैतिक गलियारों में माहोल गर्म, कांग्रेस, ओर आम आदमी पार्टी ने साधा निशाना।
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देहरादून– सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के एक बयान से राजनैतिक गलियारों में माहोल गर्मा गया है , तीरथ सिंह रावत द्वारा एक बयान में कहा गया है की उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद से प्रदेश में कमीशन खोरी और भी ज्यादा बढ़ गई है। इससे तो हम उत्तरप्रदेश में ही ठीक थे। वही पूर्व मुख्यमंत्री का बयान सामने आने के बाद कांग्रेस भी हमलावर हो गई है। अब तो सरकार का ही हिस्सा रहे पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा सांसद भी भ्रष्टाचार की बात कर रहे है, अब तो सरकार को कार्यवाही कर ही देनी चाहिए।

भाजपा की पिछली सरकार के दो पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व तीरथ सिंह रावत ने पिछले एक सप्ताह में ताल ठोक कर कहा कि उत्तराखंड प्रदेश में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने राम नगर भृमण के दौरान कहा था कि भ्रष्टाचार प्रदेश को अंदर से खोखला कर रहा है। तीरथ सिंह रावत ने दो दिन बाद कहा कि उत्तराखंड में उत्तर प्रदेश से ज्यादा कमीशनखोरी है। दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के इन बयानों के बाद यह स्वतः साबित हो गया कि 2017 से लेकर 2022 तक के इन 6 वर्षों में भाजपा की सरकार ने बारी बारी से उतराखंड में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के अलावा और कोई काम नहीं किया है। इसका सीधा मतलब है कि सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोगों की सरपरस्ती में प्रशासनिक अमला राज्य के गरीब तबके से लेकर छोटे बड़े कारोबारियों, ठेकेदारों, व्यापारियों, उद्योगपतियों, बेरोजगारों का कोई भी काम करने के लिए उनसे अवैध वसूली करते हुए राज्य में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी को बढ़ावा दे रहे हैं।
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने मुख्यमंत्री काल में नारा दिया था भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टोलरेंस का और उसकी आड़ में उनकी सरपरस्ती में राज्य में अनेक घोटाले हुए, जो आज लोगों कि जबान पर है। उनके जमाने में हरिद्वार माह कुम्भ का कोरोना टेस्टिंग घोटाला सबसे बड़ा घोटाला था जिसके कारण लोगों की जान जोखिम में आ सकती थी। वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार में भाजपा के दो मुख्यमंत्रियों के भ्रष्टाचार को लेकर दिए गए बयान किसी नए और बहुत बड़े घोटाले के उजागर होने का संकेत देते दिखाई दे रहे हैं।
उत्तराखंड राज्य के गठन के साथ ही भाजपा की अंतरिम सरकार ने साइन बोर्ड घोटाले के साथ राज्य में घोटालों कि बुनियाद रख दी थी। पंडित नारायण दत्त तिवारी जी की सरकार ने दरोगा भर्ती और पटवारी भर्ती घोटालों को अंजाम देकर उस बुनियाद को मजबूत किया। खंडूडी और निशक सरकार ने अपने कार्य काल में अनेक घोटाले करके घोटालों कि इमारत खड़ी की, उसके बाद तो सरकार में बैठे लोगों और राज्य के प्रशासनिक अमले ने भ्रष्टाचार को ऐसे पंख लगाए कि किसी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। किसी एक मुख्यमंत्री ने अगर अपने अंदर झांक कर देखा होता तो फिर आज राज्य के बेरोजगार नौजवानों की नौकरियों को बेचने वालों के हौंसले इतने बुलंद नहीं होते। अपराधी इतने बेखौफ नहीं होते, उनका साहस नहीं होता कि वह उत्तराखंड की किसी बेटी बहन की तरफ आँख उठाकर देखता। लेकिन जब भ्रष्टाचार में, कमीशनखोरी में, बेटी बहु की इज्जत से खिलवाड़ करने में सत्ता की कुर्सियों पर विराजमान महानुभाव लिप्त होंगे तो फिर अपराधी, दलाल, व्यभिचारी बेखौफ होकर गंदगी फैलाएंगे।
उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस अब भ्रष्टाचार के दलदल में इतने गहरे तक धंस चुके हैं कि अब उनका इससे बाहर निकालना संभव नहीं है।
त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत जी का यदि जमीर जागा है और जमीर जागने के बाद उन्होंने यदि यह बयान दिया तो उनको राज्य में भाजपा सरकार की सरपरस्ती में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ धरने पर बैठना चाहिए, केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा।
उत्तराखंड को कमीशनखोरी, दलाली और भ्रष्टाचार से बचाने के लिए जरूरी है कि राज्य में आम आदमी पार्टी को मौका दिया जाए। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में जनता के टैक्स के पैसे का बहुत ईमानदारी के साथ सदुपयोग करते हुए जनता को निशुल्क बिजली और पानी देने के साथ बेहतरीन शिक्षा और बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं का जो माडल पेश किया है उसका डंका पूरे देश में बज रहा है। इस लिए आम आदमी की सरकार ही उत्तराखंड के शहीदों के सपने साकार कर सकती है। भाजपा के भ्रष्टाचार , कुशासन से मुक्ति के लिए संकल्पबद्ध होकर आम आदमी पार्टी का हर सिपाही काम करेगा।

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पौड़ी सांसद तीरथ सिंह रावत का सरकारी काम में 20 परसेंट कट वाला बयान सामने आने के बाद राजनीति गर्माने लगी है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गणेश गोदियाल का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी ही सरकार की पोल खोलने का काम किया है। लेकिन उनको यह भी बताना चाहिए कि उन्होंने सीएम की कुर्सी संभालने के बाद 20 पर्सेंट को कितना कम लाने का काम किया है।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के बयान पर जवाब दिया है। मंत्री रेखा आर्य का कहना है कि पिछली सरकार के पांच साल और मौजूदा सरकार का कार्यकाल जीरो टॉलरेंस का रहा है और हर भ्रष्टाचारी को सलाखों के पीछे भेजने का काम किया गया। अब पूर्व मुख्यमंत्री ने किस संदर्भ में यह बयान दिया इसको वो ही बेहतर बता सकते है।

पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के बयान को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मनोबल तोड़ने वाला बयान बताया है। पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के मौके पर मिडिया के सवालों का जवाब देते हुए हरीश रावत ने कहा कि तीरथ रावत का बयान जनता का मनोबल तोड़ने वाला बयान है। अगर वाकई में तीरथ रावत की बात सही है तो फिर वो संकल्प लेकर इसे साबित करे।

Rupesh Negi

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