आईएएस यादव के 4 ठिकानों पर देहरादून सतर्कता टीम ने की छापेमारी, करीबियों पर भी नज़र,जल्द होंगे बड़े खुलासे।
देहरादून—उत्तरप्रदेश के एडिशनल डायरेक्टर व सचिव के पद पर आसीन रहे आईएएस डॉ0रामविलास यादव उत्तराखंड के खिलाफ आय से 500 गुना अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप के मामले में आज देहरादून सतर्कता की 4 अलग अलग टीमों ने देहरादून सहित उत्तरप्रदेश के गाजीपुर व लखनऊ में एक साथ छापेमारी की कार्यवाही की। रामविलास यादव वर्तमान में उत्तराखंड शासन में समाज कल्याण विभाग में अपर सचिव है।
डॉ0रामविलास यादव उत्तरप्रदेश कैडर के आईएएस है जोकि सरकार बदलने पर उत्तराखंड आ गए थे किन्तु आय से अधिक संपत्ति होने की शिकायत पर उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा स्वयं उन पर उत्तराखंड में जांच करवाने के आदेश दिए थे। जिसके बाद थाना सतर्कता सैक्टर देहरादून मु0अ0सं0-05/2022 धारा-13(1)ख सपठित धारा 13(2) भ्र0नि0अधि0 1988 (संशाोधित अधिनियम 2018) में आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप थे। इस विवेचना में सतर्कता विभाग द्वारा कई बार यादव को जवाब जानने को तलब किया गया किन्तु वह लगातार बहाने बनाते रहे।

इसी क्रम में जांच अधिकारी पुलिस उपाधीक्षक अनुषा बडोला द्वारा आईएएस के घरों की तलाशी हेतु कोर्ट से वारंट जारी करवाते हुए सतर्कता की 4 टीम गठित की थी। जिनके द्वारा रामविलास यादव के 1-सरकारी आवास-ए-6 टिहरी हाऊस राजपुर रोड़, उत्तराखण्ड देहरादून, 2-ग्राम परेवॉ, तहसील जखनियॉ, दौलतनगर, जनपद गाजीपुर उ0प्र0, 3-जनता विद्यालय, कुर्सी रोड़, गुडम्बा, लखनऊ, 4-11 दिलकश विहार, कालोनी, सीतापुर रोड़ थाना मडियाउ, लखनऊ पर एक ही वक़्त में छापेमारी की कार्यवाही की गयी।
सतर्कता अधिष्ठान के मुताबिक टीम द्वारा डॉ0 रामविलास के घरों पर तलाशी के दौरान केयर टेकर के अलावा कोई घर का सदस्य मौजूद नही था। चारों टीम को तलाशी के दौरान कई दस्तावेज प्राप्त हुए है, जिनके सम्बन्ध में जांच चल रही है। उक्त के अतिरिक्त डॉ0 रामविलास यादव के 11 दिलकश विहार, कालोनी सीतापुर रोड़ थाना मडियाउ स्थित आवास के सामने उनके एक तीन मंजिला मकान के सामने एक गैराज में तीन मोटर साईकिल व कार मौजूद मिली।
जनता विद्यालय, कुर्सी रोड़, गुडम्बा, लखनऊ की तलाशी पर प्रधानाचार्य बीट मल्लिका, उप प्रधानाचार्य आर0पी0 खनका मौजूद थे। जिनके द्वारा उक्त विद्यालय की प्रबन्धिका कुसुम विलास यादव पत्नी डॉ0 रामविलास यादव का होना बताया गया। स्कूल में 18 कम्प्यूटर, 15 ए0सी0 लगे है, स्कूल की कुल कीमत लगभग 10 करोड़ है। इसके अतिरिक्त अभिलेख प्राप्त हुए है, जिनकी जांच पड़ताल की जा रही है।
बिजिलेंस की जांच रिपोर्ट का इंतजार, अब रामविलास के करीबियों पर नज़र है जल्द उन पर भी कार्यवाही की जाएगी।
आईएएस रामविलास यादव व यूपीसीएल/ पिटकुल के प्रबंध निदेशक अनिल यादव एक दूसरे के समधी हैं। अनिल यादव के बेटे व रामविलास की बेटी की शादी देहरादून के एक होटल में धूमधाम से की गई थी। पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने अनिल यादव की नियुक्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक अनिल यादव की कार्यप्रणाली को लेकर एक राजनीतिक दल ने भी ट्रांसफर समेत अन्य मुद्दों पर विरोध जताया।
उत्तराखंड शासन में अपर सचिव व लखनऊ विकास प्राधिकरण के पूर्व सचिव डा. रामविलास यादव के लखनऊ, देहरादून व गाजीपुर के ठिकानों पर विजिलेंस के छापे यहां से करोड़ों रुपये की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। लखनऊ में एक स्कूल, देहरादून व गाजीपुर में डेढ़ दर्जन भूखंडों के और गाजियाबाद में एक फ्लैट होने संबंधी दस्तावेज मिले हैं। शनिवार की सुबह से जारी छापे की कार्रवाई देर शाम तक चलती रही।
सुबह सात बजे ही विजिलेंस की चार टीमों ने देहरादून के सरकारी आवास ए-6 टिहरी हाउस राजपुर रोड, उत्तर प्रदेश में ग्राम परेवा तहसील जखनियां दौलतनगर जिला गाजीपुर, लखनऊ में कुर्सी रोड गुडम्बा और दिलकश विहार कालोनी, रानी कोठी सीतापुर रोड लखनऊ, गुड़म्बा, कुर्सी रोड स्थित जनता विद्यालय में पड़े छापे के बाद चल अचल संपत्ति से जुड़े कई दस्तावेज मिले हैं।
छापे के समय राम विलास यादव व उनके घर के सदस्य गायब हो गए। सिर्फ केयर टेकर ही मिले। दिलकश विहार कालोनी सीतापुर रोड स्थित आवास के सामने एक गैराज में तीन मोटरसाइकिल व कार मिलीं।
लखनऊ के गुडम्बा में रामविलास यादव की पत्नी के नाम पर एक जनता विद्यालय भी चल रहा है । इसकी कीमत 10 करोड़ से अधिक बतायी जा रही है।
विजिलेंस सूत्रों के अनुसार यादव ने सरकारी सेवा में रहते हुए स्व. रामकरण दादा मेमोरियल ट्रस्ट गाजीपुर के अध्यक्ष पद पर खुद को काबिज करा लिया। यही नहीं जिस जमीन पर ट्रस्ट का परिसर था, दिसंबर-2021 में उन्होंने गिफ्ट डीड के आधार पर यह जमीन ट्रस्ट के नाम करा ली। यादव ने अध्यक्ष के रूप में स्टांप का शुल्क भी जमा किया।
गाजीपुर में अपनी और मैनपुरी में पत्नी का तमाम पैतृक संपत्तियों को भाइयों और बहनों के शपथपत्र के आधार पर अपने नाम दर्ज करा लिया।
देहरादून में पुलिस उपाधीक्षक अनुषा बडोला जबकि उत्तर प्रदेश में उपाधीक्षक रेनू लोहानी व अनिल मनराल ने छापेमारी की। रामविलास पूर्व में सचिव लखनऊ विकास प्राधिकरण और एडिशनल डायरेक्टर मंडी परिषद रह चुके हैं। वह वर्तमान में ग्राम विकास विभाग उत्तराखंड में समाज कल्याण, कृषि व ग्राम्य विकास विभाग में अपर सचिव सचिव के पद पर कार्यरत हैं। उनके खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत कुमार मिश्रा की शिकायत पर उत्तराखंड विजिलेंस ने एफआइआर दर्ज की थी।सपा के करीबी रहे आइएएस रामविलास यादव 2017 में योगी सरकार के आने के बाद 2019 में यूपी से उत्तराखंड आ गए। इसके बाद शासन ने 09जनवरी 2019 को उनके खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे।
यूपी में यादव के खिलाफ जांच चल ही रही थी लिहाजा उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी जांच से जुड़ी फाइलें उत्तराखंड सरकार को भेजकर विजिलेंस की खुली जांच कराने की सिफारिश की थी। इस पर इसी साल अप्रैल में यादव के विरुद्ध विजिलेंस ने मुकदमा दर्ज किया।
बार बार समन भेजने पर भी यादव विजिलेंस के समक्ष हाजिर नहीं हुए। इस पर विजिलेंस ने अदालत से आदेश लेकर शनिवार को उनके उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के ठिकानों पर छापेमारी कर कई नामी बेनामी सम्पत्तियों का खुलासा किया।
सूत्रों के मुताबिक उत्तराखंड शासन को जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि आईएएस रामविलास यादव 30 जून को रिटायर हो रहे हैं।


