वन भूमि मामले में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए : आर्य
देहरादून– ऋषिकेश के पशुलोक और उससे लगे इलाकों की 2866 एकड़ भूमि के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से की है। आर्य ने कहा है कि पूरे प्रदेश में ऐसा कोई विधानसभा क्षेत्र नहीं होगा जहां वन भूमि पर सौ वर्ष से भी अधिक समय से लोग ना बसें हो। विधानसभा के विशेष सत्र में इस विषय पर चर्चा जरूरी है ताकि ऐसे लोगों को उजड़ने से बचाया जा सकता है। यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री को इस संबंध में पत्र लिखा है। पत्र में उल्लेख हुआ है कि 22 दिसम्बर 2025 को ऋषिकेश के पशु लोक और उससे लगे इलाकों की 2866 एकड़ भूमि के मामले में उच्चतम न्यायालय के कठोर निर्देश आए है। न्यायालय ने मुख्य सचिव उत्तराखण्ड व मुख्य वन संरक्षक को इस प्रश्नगत भूमि की जांच करने के लिए एक जांच समिति बनाने के निर्देश दिए हैं। आर्य के अनुसार उच्चतम न्यायालय के इस आदेश के बाद ऋषिकेश में कई दशकों से रह रहे हजारों लोगों में अफरा-तफरी का माहौल है। सरकारी जांच कमेटी, पुलिस बल और वन विभाग के जबरदस्ती इस क्षेत्र में प्रवेश करने से महौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। उत्तराखंड राज्य के 65 प्रतिशत से अधिक भूभाग में वन हैं। ऋषिकेश की इस बड़े भू-भाग पर ही नहीं, पर्वतीय जिलो के हर क्षेत्र से लेकर, भावर, तराई और मैदानी जिलों के अनेक क्षेत्रों में यहां के निवासी पीढ़ियों से वनों में या वन भूमियों में निवासरत हैं या वनों पर आश्रित हैं। उच्चतम न्यायालय के हाल के निर्देश के बाद वन विभाग के अधिकारी एक तरफा कार्यवाही कर हजारों परिवारों को उजाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। प्रदेश भर में वनों में या वन भूमियों में निवासरत लोगों में बैचेनी और अशांति है, जो राज्य के लोगों और कानून व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। इसलिए राज्य को समय रहते अपने निवासियों को उजड़ने से बचाने के लिए उचित वैधानिक उपाय करने चाहिए। इसलिए इन मामलों में राज्य की विधानसभा में ही चर्चा के बाद ही किसी सही और वैधानिक निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।


