धर्मनगरी ऋ​षिकेश क्षेत्र में भालू की सक्रियता लोगों में दहशत,

धर्मनगरी ऋ​षिकेश क्षेत्र में भालू की सक्रियता लोगों में दहशत,
Spread the love

देहरादून/ऋ​षिकेश– ऋषिकेश में भालू की सक्रियता ने क्षेत्र के निवासियों में डर का माहौल बना दिया है। हाल ही में ग्राम सभा खदरी के वार्ड नंबर 13, गली नंबर 21 में भालू के दिखने की घटनाओं ने सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटनाएं न केवल स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय बनीं, बल्कि इनसे संबंधित अधिकारियों के लिए भी त्वरित और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को उजागर करती हैं। गुलजार फार्म में रहने वाले अनिल भट्ट के मकान के गलियारे में सीसीटीवी कैमरे में एक भालू की चहलकदमी रिकॉर्ड हुई। भालू ने न केवल घर के आसपास का इलाका घेरा, बल्कि पास में स्थित एक गेट तोड़ा और घर की सुरक्षा दिवार को भी नुकसान पहुंचाया। यह दृश्य देखकर इलाके में दहशत का माहौल हैं और ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया। इसके बाद, कनिष्ठ ब्लॉक प्रमुख बीना चौहान ने वन विभाग को सूचित किया और इलाके में सतर्कता बढ़ाने की अपील की। स्थानीय निवासियों ने बताया कि भालू कुछ देर तक गली में घूमता रहा लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं घटी।

वन विभाग की टीम ने दोनों स्थानों पर पहुंचकर भालू के पंजों के निशान ट्रैक किए और उसकी आवाजाही के रास्तों का आकलन किया। अधिकारियों का मानना है कि भालू शायद आसपास के जंगलों से भटककर आबादी वाले क्षेत्र में आ गया है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि संभवतः किसी अन्य स्थान से भालू को पकड़कर पास के जंगलों में छोड़ दिया गया हो, जिससे वह रिहायशी इलाके की ओर आ जाते हैं।

स्थानीय निवासियों और अधिकारियों की चिंता बढ़ती जा रही है। कनिष्ठ ब्लॉक प्रमुख बीना चौहान, जिला सदस्य विनीता रतूड़ी और ग्राम प्रधान संगीता थपलियाल ने प्रशासन और वन विभाग से अपील की है कि वे जल्द इस विशालकाय भालू को पकड़ने के उपाय करें। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हो गए हैं, और सुरक्षा को लेकर अब हर किसी को सतर्क रहना होगा। सभी ने वन विभाग से आग्रह किया है कि भालू के पकड़ने के लिए त्वरित कार्रवाई की जाए और इस प्रकार की घटनाओं से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाई जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी इलाकों में भोजन और आश्रय की कमी के कारण जंगली जानवर अब आबादी वाले क्षेत्रों में आ रहे हैं। इसलिए एक ठोस और दीर्घकालिक समाधान जरूरी है। सुरक्षा उपायों की जरूरत आबादी वाले क्षेत्रों में जंगली जानवरों की बढ़ती घुसपैठ को देखते हुए, प्रशासन और वन विभाग को जंगली जानवरों की घुसपैठ को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही, ग्रामीणों को भी जंगली जानवरों से सुरक्षित रहने के तरीके सिखाए जाने चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के हादसे से बचा जा सके। कनिष्ठ प्रमुख बीना चौहान ने कहा कि हमें सब मिलकर इस समस्या का हल निकालना होगा। भालू और अन्य जंगली जानवरों का आबादी में आना हम सभी के लिए खतरे की घंटी है। इस पर गंभीर विचार-विमर्श और तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। भालू के खदरी और वार्ड नंबर 13, गली नंबर 21 जैसे आबादी वाले क्षेत्रों में दिखने से यह साफ हो गया है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष अब बढ़ता जा रहा है। प्रशासन और वन विभाग को इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित और प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। ग्रामीणों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और जंगली जानवरों की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए बेहतर समाधान सुझाए जाने चाहिए। साथ ही, स्थानीय निवासियों को भी अपनी सुरक्षा को लेकर सजग रहना होगा और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना होगा।

मसूरी वन प्रभाग कार्यालय सभागार में प्रभाग दिवस जनसंवाद और समाधान का सशक्त मंच बना। इस दौरान वन विभाग के कार्यक्षेत्र से जुड़ी जनसमस्याओं, शिकायतों और सुझावों को गंभीरता से सुना गया। वन भूमि से संबंधित प्रकरणों, सीमांकन, अतिक्रमण, अनापत्ति प्रमाण पत्र, मानव-वन्यजीव संघर्ष सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा कर त्वरित निस्तारण के प्रयास किए गए। बैठक में मसूरी वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने सहभागिता की। ग्रामीणों ने अपनी-अपनी समस्याएं खुलकर रखीं, जिन पर विभागीय अधिकारियों ने मौके पर ही विचार-विमर्श किया।डीएफओ दिनेश नौडियाल ने बताया कि हर माह के अंतिम सप्ताह में प्रभाग दिवस आयोजित किया जाता है, ताकि ग्रामीणों की समस्याओं को सीधे सुना जा सके। कहा कि इस अवसर पर प्राप्त आवेदनों और सुझावों को संबंधित अधिकारियों को निस्तारण के लिए सौंप दिया गया है और समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कहा कि वर्तमान में पर्वतीय क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आया है। विशेषकर भालुओं का आबादी क्षेत्रों में प्रवेश चिंता का विषय है। इसके साथ ही गुलदार की गतिविधियां भी ग्रामीणों में भय का कारण बन रही हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए वन विभाग की विशेष टीमें गांव-गांव जाकर कार्य कर रही हैं। वन पंचायतों और स्वयंसेवकों के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में संतोष देखा जा रहा है। डीएफओ ने कहा झाड़ी कटान और स्कूलों के बच्चों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को विभाग की दस वर्षीय कार्ययोजना में शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि पूरे उत्तराखंड में भालुओं की गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। जौनपुर क्षेत्र में भी भालुओं की मूवमेंट दर्ज की गई है, जिसके मद्देनजर वन विभाग के कर्मचारियों की तैनाती की गई है। वन संपदा के संरक्षण पर जोर देते कहा कि किंगोड़ की जड़ों को खोदकर बेचना गैरकानूनी है। यदि जंगल या राजस्व क्षेत्र से अवैध दोहन किया गया तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गढ़वाल वन प्रभाग की विभिन्न रेंजों के गांवों में गुलदार की दहशत बरकरार है। जिससे ग्रामीण खौफ के साए में जीने को मजबूर है। हालांकि, गुलदार प्रभावित गांव ढांढरी और गजल्ड़ में वन विभाग की गश्त जारी है,लेकिन गुलदार की लगातार गतिविधियां बनी हुई हैं। ढांढारी में वन विभाग को अब तक गुलदार पकड़ने में सफलता नहीं मिल पाई है। ढांढरी में 21 नवम्बर को एक महिला को गुलदार ने हमला कर घायल कर दिया था। तब से वन विभाग की टीम यहां गश्त कर रही है। इसके बाद गजल्ड़ गांव में चार दिसम्बर को एक व्यक्ति को गुलदार ने मार दिया था। इसके बाद यहां एक गुलदार को वन विभाग की शिकारी टीम ने मारा,लेकिन इसके बाद भी यहां गुलदार की चहलकदमी नहीं रुकी और स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग से यहां गश्त करने और पिंजरे भी यथावत रखने की मांग की थी। तब से गजल्ड़ गांव में भी पिंजरे लगे हुए हैं। एसडीओ गढ़वाल वन प्रभाग आयशा बिष्ट ने बताया कि गुलदार प्रभावित दोनों गांवों में गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने की अनुमति फिर से मिल गई है। इन दोनों स्थानों पर गुलदार अब भी दिखाई दे रहा है। लिहाजा यहां पिंजरे भी लगाए गए हैं और टीमें भी तैनात है।

Rupesh Negi

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *