यूपीईएस के मुख्य द्वार पर निजी हॉस्टल संचालकों का हंगामा, UPSC प्रशासन पर लगाया भेदभाव का आरोप, UPSC प्रशासन ने दी सफाई।

यूपीईएस के मुख्य द्वार पर निजी हॉस्टल संचालकों का हंगामा, UPSC प्रशासन पर लगाया भेदभाव का आरोप, UPSC प्रशासन ने दी सफाई।
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देहरादून– यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (UPES) बिधोली परिसर में उस समय असहज स्थिति उत्पन्न हो गई जब बिधोली क्षेत्र के कई निजी हॉस्टल संचालकों ने यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार के बाहर एकत्र होकर प्रशासन पर भेदभावपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। हॉस्टल संचालकों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एक विशेष निजी हॉस्टल को अंदर बैठकर प्रचार करने, विद्यार्थियों को सीधे गेट से अपने साथ ले जाने और विश्वविद्यालय के नाम पर लाभ उठाने की खुली छूट दी जा रही है, जबकि अन्य हॉस्टल मालिकों को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा।

निजी हॉस्टल संचालकों का आरोप लगाया:

विरोध करने आए हॉस्टल संचालकों ने हाथ में शिकायती-पत्र लिए आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारी चुनिंदा हॉस्टल स्वामियों से मिलकर ‘हॉस्टल माफिया’ जैसा गठजोड़ चला रहे हैं। शिकायत में उल्लेख किया गया कि एक ही संचालक हर वर्ष नए नाम से हॉस्टल खोलकर छात्रों को भ्रमित करता है। आरोपों में यह भी कहा गया कि इन हॉस्टलों में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी के बावजूद भी उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को गुमराह किया जा रहा है।

जब विश्वविद्यालय प्रशासन से इस विषय पर स्पष्टीकरण माँगा गया, तो प्रशासन की ओर से कहा गया कि यूपीईएस एक अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त संस्थान है, जहां देश-विदेश से छात्र अध्ययन के लिए आते हैं। उनके अनुसार विश्वविद्यालय के पास सीमित हॉस्टल क्षमता है, इसलिए निजी हॉस्टलों को मान्यता देना एक अनिवार्य आवश्यकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ये मान्यता केवल उन्हीं हॉस्टलों को दी जाती है जो सरकारी नियमों एवं विश्वविद्यालय के मापदंडों पर खरे उतरते हैं।

यूपीईएस के रजिस्ट्रार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी हॉस्टल को मान्यता देने से पहले विश्वविद्यालय के अधिकारियों की एक टीम स्वयं उस हॉस्टल का निरीक्षण करती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह छात्र सुरक्षा, स्वच्छता, सुविधा और नियामक शर्तों के सभी मानकों पर खरा उतरता हो।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि मान्यता प्राप्त हॉस्टलों के लिए अनिवार्य है कि वे

उत्तराखंड सरकार के वाणिज्यिक भूलेख पर स्थित हों,

एमडीडीए से नक्शा पास हो,

अग्निशमन विभाग व खाद्य सुरक्षा विभाग से स्वीकृति प्राप्त हो,

और छात्रों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ व गुणवत्तापूर्ण आवास व भोजन की व्यवस्था हो।

प्रशासन ने यह भी कहा कि यदि किसी मान्यता प्राप्त हॉस्टल के विरुद्ध शिकायत प्राप्त होती है, तो तत्काल जांच कर मान्यता रद्द कर दी जाती है, और छात्रों को वहां भेजने पर रोक लगा दी जाती है। “पूर्व में भी कई हॉस्टलों के विरुद्ध कार्रवाई की जा चुकी है और यदि भविष्य में कोई भी संचालक मानकों का उल्लंघन करेगा तो उस पर भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।

यह मामला निजी हॉस्टल व्यवसाय से जुड़े पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और नियमों की स्पष्टता से जुड़ा है। जबकि एक पक्ष इसे भेदभाव मान रहा है, वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन मानकों के अनुपालन को अपना आधार बता रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रशासन एक सार्वजनिक व पारदर्शी सूची जारी करता है जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को निर्णय लेने में सुविधा मिले।

Rupesh Negi

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