देवभूमि में 1 लाख पौधरोपण का संकल्प के साथ हरेला पर्व का किया स्वागत, एक पेड़ माँ के नाम अभियान से जुड़ा उत्तराखंड।

देवभूमि में 1 लाख पौधरोपण का संकल्प के साथ हरेला पर्व का किया स्वागत, एक पेड़ माँ के नाम अभियान से जुड़ा उत्तराखंड।
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देहरादून– “एक पेड़ माँ के नाम” एक प्रयास है जो हमारी देवभूमि और प्रकृति के प्रति हमारे सम्मान और समर्पण को दर्शाता है। इस अभियान का उद्देश्य माँ के नाम पर एक पेड़ लगाना और एक स्थायी स्मृति बनाना है, जो न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा बल्कि एक हरे और अधिक समृद्ध भविष्य के निर्माण में भी योगदान देगा। माँ और प्रकृति दोनों ही जीवन का मूल आधार हैं और इस पहल के माध्यम से हम अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। “एक पेड़ माँ के नाम” का हिस्सा बनें और अपनी माँ के लिए एक अविस्मरणीय स्मृति बनाने के लिए एक पेड़ लगाएँ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस सन्देश को जन जन तक पहुंचाते हुए हरेला महापर्व के महीने में एक बार फिर भाजपा की वरिष्ठ नेता लक्ष्मी अग्रवाल निकल पड़ी है गाँव गाँव फलदार , रंगबिरंगे फूलों वाले पौधों को बांटने और खुद श्रमदान करते हुए देहरादून शहर और सहसपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में वृक्षारोपण कर रही हैं। इसी कड़ी में उन्होंने सैनिक कॉलोनी , अंबीवाला , उम्मेदपुर में फल और फूल के पौधे लगाकर लोगों को हरेला पर्व की बधाई दी और एक पेड़ माँ के नाम अभियान से लोगों को जोड़ा। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने लक्ष्मी अग्रवाल के साथ पौधा रोपण किया जिसमें वाणी भूषण गैरोला , साधना उप्रेती , रीता उप्रेती , शिवानी उप्रेती , सुनीता चौहान , बबिता भंडारी , रेखा रावत , केदार सिंह रावत , सूर्य प्रकाश उप्रेती सहित बड़ी संख्या में लोगों ने वृक्षारोपण कर हरेला पर्व मनाया।

बीते साल 2024 में भी समाजसेवी और वरिष्ठ बीजेपी नेता लक्ष्मी अग्रवाल ने हरेला के महीने में 1 लाख पौधे बांटते हुए हर दिन सैकड़ों पौधे खुद लगाए थे जो आज भी देहरादून की अनेक कॉलोनियों , सहसपुर विधान सभा की दर्जनों ग्राम सभाओं और लोगों के घरों में हरे भरे दिखाई दे रहे हैं। भाऊवाला के सैनिक कॉलोनी में हरेला पर्व के मौके पर वृक्षारोपण के दौरान स्थानीय लोगों को अभियान से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल पत्तियों की सरसराहट नहीं, संस्कृति, संकल्प और समाज की सामूहिक साधना का स्वर है। यह अभियान नहीं, धरती मां की गोद में डाला गया श्रद्धा का बीज है, जो अब पीढ़ियों तक छाया देगा, संस्कार देगा और कहेगा कि ‘मैंने एक पेड़ मां के नाम लगाया है।’

वृक्ष हमारी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं – लक्ष्मी अग्रवाल

वंही वरिष्ठ भाजपा नेता लष्मी अग्रवाल ने कहा कि वृक्ष हमारी भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। ये आस्था की छाया और सांसों के साधक हैं। अशोक वाटिका में देवी सीता की पीड़ा को वृक्षों की संवेदना से सहारा मिला था। महाभारत की कथा में अर्जुन वृक्षों की छाया में ज्ञान प्राप्त करते हैं। बुद्ध ने बोधि वृक्ष के नीचे आत्मज्ञान पाया, और महावीर ने साल वृक्ष के नीचे मौन साधना की। महर्षि अगस्त्य की कुटी बेल से घिरी थी। महाकालेश्वर भी बेलपत्र की ठंडी सांसों से तृप्त होते हैं। प्राचीन प्रयाग में याज्ञवल्क्य ने तपस्या पीपल तले की, और मिथिला की विद्यापति ने नीम के नीचे ज्ञान बांटा। आज भी तुलसी के पौधे में लक्ष्मी बसती हैं, पीपल में विष्णु का वास होता है, और बरगद की छाया में मां का आंचल उतरता है। वृक्ष इस देश में देव भी हैं और द्वारपाल भी। इसलिए यहां वृक्षारोपण अभियान नहीं ‘आत्मबोध’ है। यह हरियाली नहीं भारत की सांस्कृतिक गवाही है।

Rupesh Negi

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