माँ ने नवजात को आंचल से किया दूर, दून मे बिक गया बच्चा, नहीं लगी सरकारी तंत्र को भनक।

माँ ने नवजात को आंचल से किया दूर, दून मे बिक गया बच्चा, नहीं लगी सरकारी तंत्र को भनक।
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देहरादून– देव भूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक नवजात को बेच दिया गया। 14 अगस्त को दून हॉस्पिटल में जन्म लेने वाले इस बच्चे के माता पिता का कहना है कि उन्होंने बच्चे की अच्छी परवरिश के लिए दिल्ली के एक व्यक्ति को बच्चे को दे दिया है। बुधवार को इसकी भनक लगी थी। चार दिन की जांच पड़ताल के बाद शनिवार को इसकी पुष्टि भी हो गई। नवजात को जिस व्यक्ति को दिया गया है। उसने बच्चे के माता पिता को 50 हजार रुपये दिए हैं। राजधानी में इतनी बड़ी घटना से पूरा सिस्टम अंजान है।

मामला राजधानी देहरादून के पथरीबाग से सटे सिंघल मंडी के कुसुम विहार का है। सूचना आई थी कि सिंघल मंडी कुसुम विहार के पास एक मकान में किराये पर रहने वाले माता-पिता ने अपने नवजात को कंही बेच दिया है। उसी दिन से पति पत्नी के बीच लगातार झगड़ा और कहासुनी भी हो रही है। बच्चे का पिता और दादी बच्चे को अन्य को देने के पक्ष में थे, जबकि मां अपने बच्चे को दूर करने से दुःखी थी, यें दंपती दो मंजिला मकान के एक छोटे से कमरे में किराये पर रहते हैं। जो मूलरूप से रुद्रप्रयाग जिले के बचणस्यूं पट्टी के रहने वाले हैं। पिता अमन का गांव मरगांव बताया गया है और मां गीता का मोहड़।

घटना की जानकारी मिलने के बाद सबसे पहले दून हॉस्पिटल से इस तथ्य की पुष्टि की गई कि अमन और गीता के यहां एक बच्चा (लड़के) का जन्म हुआ है। इस दौरान जानकारी मिली कि यह बिलाल मस्जिद से सटे स्कूल के सामने स्थित मकान का मामला है। शनिवार को पुष्टि होने के बाद जब टीम उस मकान में पहुंची तो देखा कि उस मकान में छोटे-छोटे कमरे बने हुए हैं। इनमें अलग-अलग कई परिवार किराये पर रहते हैं। मकान में टीम पहुंची और निचली मंजिल में रहने वाले परिवार से टीम ने गीता और अमन के बारे में पूछा तो बताया गया कि पहली मंजिल के एक कमरे में दोनों रहते हैं।

अमन से बच्चे के बारे में पूछा तो उसने बताया कि बच्चा अपनी दादी के पास रुद्रप्रयाग में है। अमन की इस बात को सुनकर संदेह और गहरा गया। अमन लगातार गुमराह करने का प्रयास करता रहा। टीम ने उसकी पत्नी गीता से मिलने की बात कही। वह मकान की पहली मंजिल पर ले गया। जहां छोटे से कमरे में गीता मिली। गीता शुरू में अमन की कही बातों को ही दोहराती रही। लेकिन जब गहराई से सवाल किए गए तो अमन और गीता खुद अपनी बातों में उलझ गए। तब अमन ने बताया कि वह बच्चे को पालने की स्थिति में नहीं है। उसकी अच्छी परवरिश के लिए उन्होंने दिल्ली में रहने वाले दीपक थपलियाल को बच्चा दे दिया है, दीपक थपलियाल की कोई औलाद नहीं है।

अमन और गीता ने बताया कि जिस कपड़े की दुकान में गीता काम करती है, वहीं की एक महिला ने उसे दीपक थपलियाल से मिलवाया था। जिसके बाद बच्चा देने की बात हुई। हालांकि, गीता ने उस महिला के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। दंपती ने बताया कि उन पर 20 हजार का कर्ज था। दीपक ने उनको घर खर्च चलाने के नाम पर 50 हजार रुपये दिए थे। उन्होंने यह भी बताया कि इसके लिए दीपक ने एक एग्रीमेंट भी साइन करवाया था। वह दीपक के पास ही है। दीपक ने उनसे यह भी कहा था कि उनके वकील की मृत्यु हो गई है। बाद में बाकी लिखा-पढ़ी करा देंगे। उसी समय मकान में रहने वाले कुछ लोग एकत्र हो गए। अमन और गीता ने बताया कि वह मकान खाली करके जा रहे हैं। बहरहाल, अभी खुलासा होना बाकी है कि मां की ममता बिक गई या मामला कुछ और है। अमन का कहना है कि वह अपने बच्चे को बेचना नहीं चाहते थे लेकिन गरीबी के कारण और बच्चे की अच्छी परवरिश के लिए यह कदम उठाया है।

गीता खन्ना, अध्यक्ष, उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बताया की बच्चे को गोद देने से पहले कानूनी प्रक्रिया को पूरा करना होता है। भले ही गोद लेने वाला रिश्तेदार और परिचित ही क्यों न हो। अगर बिना लीगल प्रोसेस के किसी को बच्चा दिया जाता है तो वह गैरकानूनी होगा। बच्चे को गोद देने का कोई न कोई मोटिव होता है। लीगल प्रोसेस में मोटिव भी क्लियर करना होता है। ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

Rupesh Negi

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