मूल निवास का मुद्दा गरमाया, सीएम धामी ने कही अब ये बात, राजनैतिक पार्टीयां की स्वाभिमान रैली जल्द।

मूल निवास का मुद्दा गरमाया, सीएम धामी ने कही अब ये बात, राजनैतिक पार्टीयां की स्वाभिमान रैली जल्द।
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देहरादून– उत्तराखण्ड राज्य में मूलनिवास का मामला फिर से गरमाने लगा है इसके लिए 24 दिसंबर को देहरादून के परेड मैदान में प्रदेश के लोगों ने एकत्रित होकर स्वाभिमान रैली निकालने का कार्यक्रम तय किया है। स्वाभिमान रैली निकाले जाने को लेकर सोशल मीडिया में उत्तराखंड के लोक कलाकारों ने अपील भी की है। प्रसिद्ध लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने सोशल मीडिया में उत्तराखंड आंदोलन के दौरान गाए गीत उठा जागा उत्तराखंड्यूं सौ बचानू वक्त एगे उत्तराखंड का मान- सम्मान बचाणा कू वक्त एगी गीत गाकर राज्यवासियों से स्वाभिमान रैली में प्रतिभाग करने को कहा है। लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के इस गीत की उत्तराखंड आंदोलन में एहम भूमि रही। आंदोलन के दौरान नेगी के गीत को लोगों ने गंभीरता से लिया और लोग बड़ी संख्या में घरों से निकल पड़े थे। नरेंद्र सिंह नेगी ने फिर से लोगों से अपील की है की लोग मूल निवास को लेकर आगे आएं जो 23 वर्ष पूर्व उत्तराखंड आंदोलन के दौरान अपने गीत के जरिए की थी।

हालांकि अब इस मुद्दे पर 24 दिसंबर को देहरादून में होने वाली स्वाभिमान रैली से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन स्तर से आदेश जारी कर दिए हैं कि राज्य का अगर मूल निवास प्रमाण पत्र है तो वहां पर स्थाई निवास प्रमाण पत्र की कोई आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मसले पर यह भी कहा कि कमेटी बनाकर तमाम सुझाव लिए जाएंगे और फिर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि इस विषय पर किसी भी तरह की सुझाव की आवश्यकता नहीं है। मूल निवास उत्तराखंड के नागरिकों का अधिकार है। सरकार को इस पर अपना निर्णय स्पष्ट कर देना चाहिए। कांग्रेस ने यह भी कहा कि होने वाली स्वाभिमान रैली में तमाम राजनीतिक दलों को समर्थन देना चाहिए।

देखा जाए तो उत्तराखंड में इस वक्त मूल निवास का मुद्दा गरमा गया है। जहां उत्तराखंड का उदय ही आंदोलन से हुआ उसके बाद अब मूल निवास की मांग भी आंदोलन की तरफ बढ़ती दिखाई दे रही है। 24 दिसंबर को देहरादून में होने वाली स्वाभिमान रैली के बाद सरकार इस पर क्या निर्णय लेगी इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

राज्य में मूल निवास प्रमाण पत्र धारकों को स्थाई निवास प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। कोई भी विभाग या दफ्तर संबंधित व्यक्ति को इसके लिए बाध्य नहीं करेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सचिवालय प्रशासन ने इसका आदेश जारी किया है।

सचिव विनोद कुमार सुमन की ओर से मंगलवार को सभी डीएम, कमिश्नर और विभागाध्यक्षों के नाम जारी आदेश में उल्लेख हुआ है कि राज्य में सेवायोजन, शैक्षणिक संस्थाओं, प्रदेश में अन्य विभिन्न कार्यों के लिए उत्तराखंड के मूल निवास प्रमाण पत्र धारकों को संबंधित विभागों, संस्थाओं व संस्थानों द्वारा स्थाई निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किये जाने के लिए बाध्य किया जा रहा है। सचिव ने स्पष्ट किया है कि इस सम्बन्ध में सामान्य प्रशासन विभाग ने 28 सितम्बर 2007 को एक शासनादेश जारी किया था और स्पष्ट कर दिया था कि मूल निवास प्रमाण पत्र धारकों के लिये स्थायी निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। सचिव ने कहा है कि जिन प्रयोजनों के लिए स्थाई निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता है,उसके लिए यदि कोई व्यक्ति मूल निवास प्रमाण पत्र पेश करता है तो उसे स्थाई निवास प्रमाण पत्र पेश करना आवश्यक नहीं है। कोई भी व्यक्ति या संस्था द्वारा इस आदेश का उल्लंघन किया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी अधिकारियों से इस आदेश का पालन कराने को कहा गया है।

दरअसल, विभिन्न सामाजिक संगठन सरकारी संस्थानों या संस्थाओं में स्थायी निवास प्रमाण पत्र पेश करने की बाध्यता के खिलाफ लंबे समय से आवाज उठा रहे थे। उनका कहना है कि उत्तराखंड के जिस नागरिक के पास मूल निवास प्रमाण पत्र है उसे स्थानीय निवास पत्र बनवाने को क्यों कहा जा रहा है। खासकर सेवायोजन विभाग से इस तरह की काफी शिकायतें आ रही थी। इस व्यवस्था को खत्म करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने को 24 दिसम्बर को देहरादून में स्वाभिमान रैली का आयोजन किया गया था। मंगलवार को लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने इस आंदोलन को अपना समर्थन किया और फेसबुक पोस्ट के जरिए उत्तराखंड के आम लोगों से इस स्वाभिमान रैली से जुड़ने की अपील की। नेगी ने लिखा कि उत्तराखंड में मूल निवास की व्यवस्था खत्म होने से मूल निवासियों की पहचान पर संकट आ गया है। आज दूसरे राज्यों से आए 40 लाख से अधिक लोग स्थायी निवासी बन गये हैं। ऐसे में समय आ गया है कि अपने हक हकूक और स्वाभिमान की लड़ाई को लक्ष्य तक पहुंचाया जाए। नरेंद्र नेगी के पोस्ट के बाद उत्तराखंड क्रांति दल ने अपनी केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दूसरे दिन मंगलवार को मूल निवास 1950 की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव पास किया।

 

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Rupesh Negi

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